पाकिस्तान के बनने के बाद से ही इसके शासकों और विशेषकर इसकी सेना ने अपनी भौगोलिक स्थिति को एक ‘कमोडिटी’ यानी वस्तु के रूप में देखा है।
एक ऐसी वस्तु जिसे सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को किराए पर दिया जा सकता है। इस वैश्विक नीलामी में अमेरिका हमेशा से सबसे बड़ा खरीदार रहा है। यानी 1947 में पाकिस्तान के जन्म लेने से लेकर अब तक, अमेरिका ने अक्सर इस देश को अपनी जरूरतों के मुताबिक खूब इस्तेमाल किया। बदले में पाक को क्या मिला? चंद डॉलर। जिनसे आवाम का तो नहीं पता, लेकिन सैन्य रसूखदारों का पेट खूब भरता गया।