महाराष्ट्र के राज्यपाल ने नहीं दी मंजूरी, ‘धर्म की स्वतंत्रता’ विधेयक राष्ट्रपति को भेजा, जानें बिल में क्या
महाराष्ट्र के गवर्नर जिष्णु देव वर्मा ने विवादित ‘धर्म की स्वतंत्रता बिल 2026’ को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास विचार और मंज़ूरी के लिए भेजा है। अधिकारियों ने बताया कि राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने इस बिल को अपनी मंज़ूरी नहीं दी, क्योंकि यह बिल BNS के उन प्रावधानों से जुड़ा है जो ‘समवर्ती सूची’ (Concurrent List) का हिस्सा हैं। इस सूची के विषयों का असर केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों पर पड़ता है।
मार्च महीने में, सत्ताधारी ‘महायुति’ गठबंधन और विपक्षी दल ‘सेना (UBT)’ के समर्थन से राज्य की विधायिका ने इस ‘धर्म की स्वतंत्रता बिल 2026’ को पारित कर दिया था। कांग्रेस, NCP (SP), SP और CPI(M) ने इस बिल का विरोध किया था।
30 से भी ज़्यादा नागरिक समाज संगठनों ने मिलकर इस प्रस्तावित ‘धर्म-परिवर्तन विरोधी कानून’ के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि यह कानून बिना किसी सार्वजनिक बहस के, किसी भी व्यक्ति के अपनी मर्ज़ी से शादी करने और धर्म चुनने के अधिकार पर सीधा हमला है।